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Home    Crimes Against Infants in India – Latest News & Child Protection

Latest News

12 Mar 2018

उन्हें बच्ची को बचाने का अधिकार है, पालने का नहीं…

      
पुकार रजक और उनकी पत्नी मीना देवी की शादी को करीब आठ साल हो गए, लेकिन कोई संतान नहीं थी। उस दिन तड़के वह खेत की तरफ गए पानी पटाने के लिए, जब खेत की आरी के किनारे हरे रंग के कपड़े में लिपटी एक बच्ची पर उनकी निगाह पड़ी। वह दो-तीन दिन की नजर आ रही थी। उन्होंने उसे उठाया और अपने घर ले गए। घटना इटाढ़ी थाना क्षेत्र के जयपुर गांव में नहर के समीप सोमवार को घटी। बाल संरक्षण इकाई (सीडब्लूसी) की प्रतिमा जी ने पा-लो ना को बताया कि पुकार रजक और मीना देवी निस्संतान हैं।... Continue Reading..
11 Mar 2018

ये एक दिल दहलाने वाला दृश्य था…

      
सुबह का समय था, जब लोगों का ध्यान एक वीभत्स दृश्य ने अपनी तरफ खींच लिया। झाड़ियों में कुछ ऐसा पड़ा था, जिसे जानवर नोंच रहे थे। यह एक नवजात लड़का था। उसके क्षत-विक्षत अंग आस-पास बिखरे हुए थे। किसने फेंका, कब फेंका, जिंदा फेंका या वह मृत ही था, जब वहां उसे फेंका गया था, ये वे सवाल हैं, जिनके बारे में अभी तक कुछ पता नहीं चल सका है। स्थानीय पत्रकार श्री कुंतलेश पांडे ने पा-लो ना को बताया कि 11 मार्च की सुबह का समय था, जब झुमरीतिलैया पानी टंकी रोड स्थित मुक्तिधाम में एक नवजात बच्चे... Continue Reading..
10 Mar 2018

क्यों और कैसे किया उसने ये, क्या कोई जान पाया…

      
वह अपनी तीन माह की बेटी को लेकर मध्यप्रदेश गई थी, लौटी तो बेटी साथ नहीं थी। आस-पड़ौस के लोगों ने पूछा तो उसने कहा, बेटी बहुत बीमार थी, उसकी मौत हो गई तो वहीं दफना दिया। पड़ौसियों को विश्वास नहीं हुआ और उनके अविश्वास ने उस निरपराध मासूम बच्ची के कत्ल की कहानी पर पड़ा पर्दा हटा दिया। घटना राजस्थान के कोटा शहर की है। पत्रकार श्री हंसपाल यादव ने पा-लो ना को बताया कि कोटा के गुमानपुरा थाना क्षेत्र में मल्टीपर्पज स्कूल के पास मजदूरों की बस्ती है। वहीं यह महिला अपने परिवार के साथ रहती थी। इसकी... Continue Reading..
09 Mar 2018

नन्हें बच्चों को नदी में फेंकने की हिम्मत कहां से लाए थे तुम…

      
एक कार अचानक वहां आकर रुकी, एक युवक उसमें से निकला और उसने अपने हाथ में थामे पॉलीथिन को हिरन नदी में फेंक दिया। वहीं पास में ही बच्चे खेल रहे थे, जिन्होंने उस युवक को पॉलीथिन फेंकते और फिर उस पॉलीथिन में से बाहर निकलते नवजात बच्चों के शवों को देखा और शोर मचाकर लोगों को बुला लिया। घटना शुक्रवार की शाम चार-साढ़े चार बजे के आस-पास कुशलगढ़ थाना क्षेत्र के मंगलेश्वर गांव स्थित मठ के समीप हिरन नदी के पुल पर घटी। पत्रकार श्री रवि राठौर ने पा-लो ना को बताया कि इन बच्चों में एक लड़का है... Continue Reading..
09 Mar 2018

अगर वो रोती नहीं तो क्या बच पाती…

      
वह खेत में पड़ी रो रही थी, जब कुछ ग्रामीणों को उसके रोने की आवज सुनाई दी। पता नहीं, वह कब से वहां पड़ी थी। बच्ची के रोने की आवाज सुनकर जब कुछ लोग उस दिशा मे बढ़े तो वहां खेत की मिट्टी में दो माह की एक बच्ची को देखकर स्तब्ध रह गए। थोड़ी ही देर में वहां भीड़ इकट्ठा हो गई और उन्हीं में शामिल एक ग्वालिन ने उसे उठा लिया। घटना शुक्रवार सुबह छह-सात बजे के समीप खिरमा बिरखौली मार्ग पर खिरमा गांव के पूरब पुलिया के समीप गेहूं के खेत में घटी। चाईल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर श्री... Continue Reading..
09 Mar 2018

काश, उन्होंने उसे बचाने का कुछ तो प्रयास किया होता…

      
उन्हें शायद जिंदा ही फेंक दिया गया था और आस-पास के कुत्तों को उनकी गंध मिल गई थी। बच्चे भी शायद दो थे, जैसा कि प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया। वे बोरे में बंद थे, जिनमें से एक को कुत्ते खींच कर बाहर निकाल लाए। उसका हश्र वही हुआ, जो इस तरह के मामलों मे अब तक होता आया है। वह कुत्ते के मुंह में तड़पता रहा। जब तक लोग उस कुत्ते को भगाते और उसे बचाते, वह दम तोड़ चुका था। घटना जमुई के बोधवन तालाब रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक के पास घटी। स्थानीय पत्रकार श्री राजेश और श्री प्रशांत... Continue Reading..
09 Mar 2018

ये तो अवशेष मात्र था…

      
उस नवजात शिशु को एक सुअर अपने मुंह में लेकर आया था। शरीर का अधिकांश हिस्सा वह खा चुका था। केवल एक हाथ ही बाकी था। उस शिशु का सिर भी नहीं था। घटना 09 मार्च की सुबह झारखंड की राजधानी रांची में घटी थी। पा-लो ना को मिली जानकारी के मुताबिक राजधानी रांची के कांके रोड पेट्रोल पंप के सामने हातमा बस्ती है, जिसका एक सिरा मोराबादी से मिलता है। यहीं सरना टोली तालाब के निकट मैदान में मौजूद लोग उस दिन वह खौफनाक मंजर देखकर दहल गए। एक सुअर न जाने कहां से एक नवजात शिशु का शव... Continue Reading..
03 Mar 2018

बेटी को पटककर मारने वाले इस पिता को भी क्या वैसे ही पटकना चाहिए……

      
उसका कोई कसूर नहीं था। वह तो बस मम्मी-पापा के बीच हुए झगड़े में बलि चढ़ा दी गई। पिता को इतना गुस्सा आया कि जमीन पर पटक-पटक कर उसके प्राण ले लिए। घटना नालंदा जिले के हिलसा थाना इलाके के मनसा बिगहा गांव में शनिवार को घटी। स्थानीय पत्रकार श्री ऋषिकेश ने बताया कि 09 माह की अबोध बच्ची का पिता लल्लू विंद उसकी मां रेशमी देवी के साथ मार-पिटाई कर रहा था। वह उसे 13 हजार रुपये अपने मायके से लाने का दबाव बना रहा था। आरोप है कि उसने रेशमी पर पिस्तौल भी तान दी। इस दौरान घर... Continue Reading..
28 Feb 2018

ये मां मजबूर थी, फिर भी समाज को रास्ता दिखा गई…

      
उसकी मां ने उसे छोड़ दिया, जन्म के एक घंटे बाद ही, लेकिन वह सुरक्षित हैं, क्योंकि उसकी मां ने एक समझदारी भरा फैसला किया था। उसे असुरक्षित स्थान पर छोड़ने की बजाय वह उसे उसी अस्पताल को सौंप कर चली गई, जहां उसे जन्म दिया था। घटना उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित एक निजी अस्पताल में बुधवार रात की है। गाजियाबाद चाईल्ड वेलफेयर कमेटी के श्री आरिफ ने पा-लो ना को बताया कि एक लड़की अपनी मां के साथ गाजियाबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती हुई और नार्मल डिलिवरी में एक लड़के को जन्म दिया। जन्म के एक... Continue Reading..
26 Feb 2018

बच्चों को कहीं भी दफनाना क्या सही है…

      
वह भी गड्ढे में दबा हुआ था, हर बार की तरह ये मालूम करना कठिन था कि उसे मौत के बाद वहां दफनाया गया था या फिर वहां दबाने की वजह से उसकी मौत हुई थी। घटना रांची में खेलगांव, बूटी मोड़ के नजदीक सैनिक कॉलोनी की है, जहां सोमवार की सुबह उसके वहां उपस्थिति ने लोगों को हैरान-परेशान कर दिया। स्थानीय पत्रकार इमरान और प्रशांत के मुताबिक, 26 फरवरी की सुबह एक नवजात लड़के के गड्ढे में दबे मिलने की घटना ने आस-पास के इलाके में सनसनी फैला दी। जिसने सुना, वही कौतुहलवश वहां पहुंच गया। सब सच जानने... Continue Reading..
25 Feb 2018

सुअर के लिए परोस दिया…आह ! कितना नीचे गिरा लिया तुमने खुद को…

      
वह कूड़े के ढेर पर पड़ी कराह रही थी, जब दिवाकर सिंह की नजर उस पर पड़ी। आस-पास 5-6 सुअर घूम रहे थे। उसके शरीर पर खून लगा था और शरीर के पिछले हिस्से को सुअरों ने खा लिया था। घटना सहरसा के न्यू कॉलोनी की है। स्थानीय पत्रकार श्री विनय और श्री कुंदन द्वारा इस मामले की सूचना मिलने के बाद सहरसा के बाल संरक्षण पदाधिकारी श्री भास्कर कश्यप से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि बच्ची की स्थिति बहुत खराब है। इन बच्चों को निजी हॉस्पिटल वाले एडमिट भी नहीं करते, लेकिन इस घटना में बच्ची की... Continue Reading..
25 Feb 2018

क्या उसके आंसुओं ने दी उसके कत्ल की गवाही…

      
उसके गालों पर लुढ़के हुए आंसुओं के सूखे से निशान थे। ये आंसू भूख से निकले थे, डर से निकले थे, या उस सदमे से, जो अपनों ने दिया था, कहा नहीं जा सकता। वो भले ही बोल नहीं सकती, लेकिन महसूस तो कर सकती थी। उसी अहसास ने उसे बता दिया था कि अब वह किसी की राजदुलारी नहीं है, इसलिए मुलायम बिछौने या मां की नर्म गोद में नहीं, बल्कि झाड़ियों में पड़ी है। न जाने कब वहां फेंकी गई थी और कितनी देर जीवित रही, जब तक उस पर किसी की नजर पड़ी, उसमें कुछ बाकी नहीं... Continue Reading..

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PaaLoNaa is a cause dedicated to those infants who have been shunned by their own parents. These infants are adandoned in deserted public places like railway lines, ponds, bushes, forests, barren lands for some or the other reasons, compulsions, fears or greed.

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