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Home    Crimes Against Infants in India – Latest News & Child Protection

Latest News

19 Apr 2018

नजर का टीका तो लगाया, पर अपनी नजर में न रख सके…

      
वह बच्चा तीन-चार माह का था। अच्छे कपड़े पहने पहुए थे, माथे पर नजर का टीका भी लगा हुआ था, लेकिन वह किसी आंगन या किसी गोद में नहीं था। वह पड़ा था सड़क किनारे झाड़ियों में और उसके चेहरे पर जख्म था, जिस पर कीड़े चिपके हुए थे। घटना झारखंड के चाईबासा में मंझारी थाना के जांगीबुरु घाटी में गुरुवार को सुबह के समय घटी। पत्रकार श्री उपेंद्र कुमार से सूचना मिलने के बाद जब पा-लो ना टीम ने चाईबासा के बाल हित कार्यकर्ता श्री विकास दोरदाजका से बात की तो उन्होंने बताया कि उनके पास इस संबंध में... Continue Reading..
13 Apr 2018

इस कृत्य के लिए कोई माफी नहीं…

      
वह प्लंबर वहां जाम हो चुके कमोड को खोलने आया था। सबने यही सोचा था कि उसमें कुछ कूड़ा आदि फंस गया होगा। लेकिन सफाई के दौरान वहां से जो निकला, उसने सबके होश उड़ा दिए। यह एक नवजात बच्ची थी, जो कमोड के डक में फंसी हुई मिली। घटना केरल के पलक्कड में शुक्रवार को घटी। स्थानीय पत्रकार ने बताया कि पलक्कड़ जिले में डॉ. अब्दुल रहमान का एक क्लीनिक है जो उनके घर के नजदीक है। शुक्रवार को उन्हें कमोड के जाम होने की सूचना मिली तो उन्होंने प्लंबर को बुलवाया। प्लंबर ने उसे खोलने के प्रयास में... Continue Reading..
11 Apr 2018

इसका पोस्टमार्टम करने वाला कोई डॉक्टर नहीं था, बल्कि…

      
उसका शव पोस्टमार्टम रूम के पास पड़ा था, सफेद कपड़े में लिपटा। कलाई पर पट्टी भी बंधी थी। उसका भी पोस्टमार्टम हो रहा था, लेकिन करने वाला कोई डॉक्टर नहीं, बल्कि उस एरिया के कुत्ते थे। यह वीभत्स नजारा बुधवार को कोडरमा के सदर अस्पताल में दिखाई दिया। पत्रकार श्री कुंतलेश पांडे ने पा-लो ना को बताया कि किसी ने एक शिशु के शव को सदर अस्पताल, कोडरमा के पोस्टमार्टम रूम के समीप फेंक दिया था, जिसे कुत्ते नोंचकर खा रहे थे। यह लड़का था या लड़की, कहना और पता करना दोनों ही मुश्किल थे। आसपास के लोगों की नजर... Continue Reading..
09 Apr 2018

ये एक कन्या शिशु का शव था…

      
एक कपड़े में लिपटा उसका शव कार्टन में बंद था। उसे एक टूटी हुई ईमारत की झाड़ियों में फेंक दिया गया था। घटना सोमवार की सुबह देवघर में घटी। जमुई से पत्रकार राजेश जी की सूचना पर जब पा-लो ना टीम ने देवघर के पत्रकार श्री रजनीश से संपर्क किया तो उन्होंने घटना की पुष्टि की और बताया कि यह एक कन्या शिशु थी। उसका शव सोमवार की सुबह देवघर के नगर थाना क्षेत्र के पुरणदाहा पुल के पास कार्टन में बंद मिला है। उसके शरीर पर साड़ी या दुपट्टे जैसा कोई कपड़ा लिपटा हुआ है, जिसे तस्वीर में भी... Continue Reading..
09 Apr 2018

क्या मजबूरी, ममता से ज्यादा बड़ी थी…

      
पार्क और बच्चे एक-दूसरे के पर्याय हैं, लेकिन यदि किसी पार्क में एक नवजात शिशु किसी बेंच पर अकेला मिले तो मन में कितने ही सवाल खलबली मचा देते हैं। कुछ ऐसा ही हाल दिल्लीवासियों का सोमवार की सुबह हुआ, जब उन्होंने करीब 6-7 दिन के एक बच्चे को एक पार्क में अकेले पाया। वह चादर में लिपटा बेंच पर लेटा था। उसके मिलने के हालात उसके जनक की मजबूरी की चुगली कर रहे थे। दिल्ली से पत्रकार श्री राजन शर्मा ने बताया कि पूर्वी दिल्ली के मंडावली इलाके में आज सुबह एक शिशु मिला, जो शायद सप्ताह भर पहले... Continue Reading..
09 Apr 2018

उनका ये कदम बच्ची के लिए जानलेवा न बन जाए…

      
एक नवजात बच्ची खेत की जमीन पर पड़ी रो रही थी, उसके रोने की आवाज से आस-पास लोगों का जमघट भी लग गया था, लेकिन कोई भी उसे उठाने का साहस नहीं कर पा रहा था। तब पुलिस को बुलाया गया और उसने ही बच्ची को वहां से उठा कर मुखिया के सुपुर्द कर दिया। यह घटना उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर स्थित गोगाव गांव में सोमवार को तड़के घटी। मिर्जापुर से चाईल्ड वेलफेयर कमेटी के पूर्व सदस्य एवं पत्रकार श्री बसंत लाल श्रीवास्तव ने पा-लो ना को बताया कि मिर्जापुर के थाना जिगना के अन्तर्गत पीआरवी 1093 को सुबह करीब... Continue Reading..
07 Apr 2018

क्योंकि वह लड़का नहीं थी…

      
क्योंकि वह लड़का नहीं थी। इसलिए उसे गले तक गड्ढे में दबा दिया गया। उसे कोई बचा न ले, इसलिए उसके चेहरे को भी पत्तों से ढक दिया गया था। उसने रातभर भीषण तूफान और बारिश झेली, लेकिन सांसों की डोर को टूटने नहीं दिया। घटना उड़ीसा के सुंदरगढ़ इलाके में घटी। पत्रकार रवि रणवीरा ने बताया कि शनिवार को एक दिन की नवजात बच्ची को बोनाई के सनाझरण के जंगल वाले इलाके में बेहद खराब हालत में पाया गया। वह गले से नीचे मिट्टी में दबी हुई थी। केवल उसका चेहरा और सिर उस गड्ढे से बाहर था, जिसे... Continue Reading..
04 Apr 2018

क्या हम उसे न्याय दिला पाएंगे…

      
वह शायद कुछ ही घंटो या एक दिन पहले जन्मी थी कि उसे प्लास्टिक के बोरे में बांध कर एक गड्ढे में फेंक दिया गया। इसमें कोई शक नहीं कि उनका इरादा उसे मारने का था और वे अपने इरादे में कामयाब रहे। एक अबोध जीवन के हत्यारे सफल हो गए और हमारा सिस्टम उस जीवन को बचाने में विफल रहा। लेकिन क्या वह उस मासूम को न्याय दिला पाने में सफल होगा, बड़ा सवाल अब यही है। घटना आरा के जगदीशपुर थानाक्षेत्र के इसाढ़ी बाजार से सटे विमवां हैलीपेड के पास बुधवार की सुबह घटी। अपने खेतों में गेहूं... Continue Reading..
04 Apr 2018

थैंक यू मां, कि तुमने मुझे मारा नहीं…

      
वह बहुत प्यारी है, स्वस्थ भी। जो देखता है, गोदी में लेने को मचल जाता है। उसे गोद लेने के लिए कई लोगों ने आवेदन भी दे दिया है। लेकिन जिसकी कोख से वह पैदा हुई, वह उसे अपनाने को तैयार नहीं। हो सकता है कि उसने नजर भर बच्ची को देखा भी न हो, देखती तो शायद छोड़ कर नहीं जा पाती। घटना धनबाद के पीएमसीएच में बुधवार को घटी। एक नवयुवती, उम्र करीब 18 साल, सोमवार मध्य रात्री 11 बजे के समीप धनबाद स्थित पीएमसीएच में आई। वह अकेली थी, या उसके साथ कोई परिजन भी था, इसे... Continue Reading..
04 Apr 2018

साहस ने जिंदा रखा साहस को……

      
साहस की उम्र दो दिन से ज्यादा नहीं थी। जमीन पर पड़ा था एक तालाब के किनारे। कीड़े जहां-तहां काट रहे थे। दर्द से बिलबिला रहा था, लेकिन उन कीड़ों को खुद से दूर नहीं कर पा रहा था। घटना उड़ीसा के ढेंकानाल में बुधवार को घटी, जहां एक नवजात शिशु परजंग पुलिस स्टेशन एरिया में स्थित रिया गांव में तालाब के किनारे मिला। बाल कल्याण समिति की श्रीमती शांतिलता मिश्रा और पत्रकार रवि रणवीरा ने पा-लो ना से बातचीत में बताया कि साहस नामक यह शिशु बहुत ही खराब स्थिति में मिला था। वह करीब दो दिन का था... Continue Reading..
01 Apr 2018

उस मां ने ममता का गला घोंट दिया, लेकिन बच्ची की बेहतरी के लिए…

      
वह पूरे दर्द में थी, जब उस नर्सिंग होम में पहुंची। पहुंचने के कुछ ही देर के अंदर उसने एक प्यारी सी बेटी को जन्म दिया और इसके कुछ ही मिनटों के भीतर गायब हो गई। घटना बिहार के कैमूर स्थित मोहनिया रोड में 01 अप्रैल को घटी। कैमूर के पत्रकार श्री देवब्रत तिवारी ने पा-लो ना को बताया कि एक अप्रैल की रात्रि दो महिलाएं मोहनिया रोड स्थित एक निजी नर्सिंग होम में पहुंचीं। एक महिला को डिलीवरी पेन हो रहा था। डॉक्टर उसे तुरंत एमरजेंसी में ले गए। कुछ ही देर बाद उस महिला ने एक प्यारी सी... Continue Reading..
20 Mar 2018

कहां है इसके हत्यारे…

      
एक स्वस्थ शिशु झाड़ियो में मिलता है, एक महिला उसे उठाती है, उसे दूध पिलाती है, अस्पताल ले जाने लगती है कि मुखिया पति उससे बच्चा छीन लेता है और फिर न जाने क्या होता है कि बच्चे की मौत की सूचना मिलती है। शक पैदा करने वाली यह घटना हजारीबाग के केरेडारी में 20 मार्च, मंगलवार की सुबह घटी। स्थानीय पत्रकार ने पा-लो ना को बताया कि मंगलवार की सुबह करीब सात बजे एक महिला को केरेडारी में सड़क किनारे स्थित झाड़ियों में एक नवजात शिशु मिला। ऐसा लगता था कि उसका जन्म कुछ ही देर पहले हुआ हो।... Continue Reading..

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PaaLoNaa is a cause dedicated to those infants who have been shunned by their own parents. These infants are adandoned in deserted public places like railway lines, ponds, bushes, forests, barren lands for some or the other reasons, compulsions, fears or greed.

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