15 May 2018
इस बार मां नहीं, पिता कठघरे में है…
वह अपने पिता के हाथों में मौजूद कैरीबैग में बंद थी और उल्टियां कर रही थी। उस पिता के हाथों में, जो उसे बेचने निकला था। पिता, जो मानसिक रूप से स्वस्थ है और एक अच्छे स्टोर में काम करता है। लेकिन क्या वह सचमुच मानसिक रूप से स्वस्थ है, ये सवाल जरूर उठेगा, जब ये पूरी घटना पढ़ेंगे, जो सिविल अस्पताल, फेज 06, मोहाली की एमरजेंसी में मंगलवार रात 10 बजे के करीब घटी। एक संवेदनशील नागरिक श्री विक्रम सिंह कटारिया से इस घटना की जानकारी मिलने के बाद जब पा-लो ना टीम ने चंडीगढ़ के सीनियर जर्नलिस्ट दीपकमल... Continue Reading..
