21 Jun 2018
मजो यह ना जागती, तो वह सो जाती मौत की नींद…
क्या ऐसा संभव है कि किसी की नींद अन्य के लिए मौत का पैगाम साबित हो। क्या ये भी संभव है कि किसी की जिंदगी अन्य के जागने पर टिकी हो। संभव और असंभव के मध्य में एक घटना बंगलौर में उस गुरुवार घटी, जिसने इन प्रश्नों को जन्म दिया। ये वही घटना थी, जिसमें दरवाजे पर पड़ी महज दो घंटे की ज़िंदगी सुधा के जागने पर ही टिकी थी। सीनियर जर्नलिस्ट श्री नेहाल अहमद ने पा-लो ना को बताया कि सुधा वसन बंगलुरु के रमैय्या में रहती हैं। सुबह चार बजे जब किसी के रोने की आवाज़ सुनाई दी... Continue Reading..
