शरीर पर लगा था मेडिकल क्लिप
अस्पताल के ‘बर्थ किट’ से मिल सकता है दोषियों का सुराग
गढ़वा, झारखंड | 03 जून 2026 | टीम पालोना
समाज में जागरूकता की कमी और बच्चों के प्रति संवेदनशीलता के अभाव के कारण असुरक्षित परित्याग की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। झारखंड के गढ़वा जिले के डंडई थाना क्षेत्र में एक नवजात बच्ची का शव तालाब में मिलने से हड़कंप मच गया है।
‘पा लो ना’ टीम को सूचना —
इस घटना की प्राथमिक जानकारी गढ़वा के सक्रिय पत्रकार श्री अनूप कुमार ने ‘पा लो ना’ के झारखंड ग्रुप में साझा की थी।
घटना का विवरण —
3 जून 2026 को डंडई थाना क्षेत्र के अंतर्गत डंडई गांव में स्थित सोनेहरा मोड़ के पास एक तालाब से नवजात बच्ची का शव बरामद हुआ। यह तालाब पूर्व सरपंच रामा प्रसाद का बताया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने सोमवार सुबह टहलने के दौरान तालाब के पानी में शव तैरता हुआ देखा, जिसके बाद पुलिस को सूचित किया गया।
घटना स्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार, बच्ची के शरीर पर अस्पताल में जन्म के समय इस्तेमाल किया जाने वाला ‘मेडिकल क्लिप’ लगा हुआ था।
शव की स्थिति को देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि जन्म के तुरंत बाद या बीती रात ही उसे तालाब में छोड़ा गया होगा, क्योंकि शरीर सड़ा-गला नहीं था। अस्पताल का क्लिप लगा होना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि बच्ची का जन्म किसी अस्पताल (सरकारी या निजी) में ही हुआ है।
पुलिस और कानूनी कार्रवाई —
सूचना मिलते ही डंडई थाना प्रभारी अनिमेष शान्तिकारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए गढ़वा सदर अस्पताल भेज दिया है। पुलिस प्रशासन द्वारा मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है और सभी पहलुओं, विशेषकर क्षेत्रीय अस्पतालों के प्रसव रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है ताकि दोषियों की पहचान की जा सके।
‘पा लो ना’ का दृष्टिकोण —
“इस घटना में बच्ची के शरीर पर मेडिकल क्लिप का मिलना एक महत्वपूर्ण सुराग है। यह स्पष्ट करता है कि जन्म किसी संस्थागत देखरेख में हुआ था, फिर भी उसे असुरक्षित रूप से तालाब में डाल दिया गया।
तालाब में डालते समय बच्ची जीवित थी या नहीं, इसका पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा।
इसके पीछे कारण क्या रहा होगा, अभी कहना मुश्किल है। बहुत संभव है कि बच्ची की प्राकृतिक रूप से मृत्यु हुई हो और उसका जल दाह (एक प्रकार का अंतिम संस्कार) किया गया हो।
इसके अलावा, यह जेंडर डिस्क्रिमिनेशन से जुड़ा भी हो सकता है। या फिर यह भी संभव है कि बच्ची किसी ऐसे रिश्ते का परिणाम हो, जिसे अपने साथ रखने में माता पिता को बदनामी का डर हो।
किसी भी परिस्थिति में एक नवजात को इस तरह तालाब में डालना सही नहीं है। ‘पा लो ना’ लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि यदि नवजात की मृत्यु स्वाभाविक है तो इसका डेजिगनेटेड प्लेस पर अंतिम संस्कार होना चाहिए। और यदि परिवार जीवित बच्चे को स्वीकार नहीं कर सकता, तो उसे असुरक्षित तरीके से त्यागने के बजाय कानूनी माध्यम से सरेंडर किया जाए।”
— मोनिका आर्य, संस्थापक, ‘पा लो ना’
Call to Action —
विकल्प चुनें, त्याग नहीं!
बच्चे को असुरक्षित स्थान पर छोड़ना उसके जीवन को संकट में डालना है। यदि आप बच्चे का पालन-पोषण करने में असमर्थ हैं, तो उसे तालाब, झाड़ियों या सड़क किनारे छोड़ने के बजाय सुरक्षित विकल्प चुनें। आप बिना किसी कानूनी अड़चन और अपनी पहचान उजागर किए बिना बच्चे को ‘Safe & Legal Surrender’ के माध्यम से किसी भी विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान (SAA) या बाल कल्याण समिति (CWC) को सौंप सकते हैं।
चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098 | पुलिस सहायता: 112
पालोना :-9798454321
