मासूम ने तोड़ा दम
औरैया, उत्तर प्रदेश, 03 अप्रैल 2026
जिस नन्ही ज़िंदगी को आते ही अपनापन और सहारा मिलना चाहिए था, उसे बेदर्दी से तन्हा छोड़ दिया गया। उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में एक मासूम नवजात को न केवल असहाय छोड़ा गया, बल्कि उसकी सांसें छीनने की कोशिश भी की गई। उसके मुंह में कपड़ा डालकर उसे गेहूं के खेत में छोड़ दिया गया। यह दिल दहला देने वाली घटना इंसानियत पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
घटना का विवरण —
यह दर्दनाक मामला शुक्रवार, 3 अप्रैल की सुबह का है। थाना फफूंद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव भौनकपुर में किसान संदीप अपनी पत्नी निशा के साथ सुबह करीब 5:00 बजे अपने खेत में गेहूं की कटाई करने पहुंचे थे। कटाई के दौरान जब वे खेत के बीचों-बीच पहुंचे, तो उन्हें वहां एक नवजात शिशु (बालक) का शव पड़ा मिला।
दृश्य अत्यंत विचलित करने वाला था; मासूम के मुंह में कपड़ा भरा हुआ था। किसान दंपति के शोर मचाने पर ग्रामीण एकत्रित हो गए और तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई।
प्रशासनिक एवं विधिक कार्रवाई —
सूचना मिलते ही फफूंद थाना प्रभारी अजय कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया।
- पोस्टमार्टम: पुलिस ने शिशु के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
- मृत्यु का कारण: प्रारंभिक आशंका जताई जा रही है कि शिशु के जन्म के तुरंत बाद उसकी पहचान छिपाने या उसकी आवाज दबाने के लिए मुंह में कपड़ा भर कर छोड़ दिया गया, जिससे दम घुटने (Suffocation) के कारण उसकी मौत हो गई।
- पुलिस जांच: थाना प्रभारी के अनुसार, आसपास के गांवों और स्थानीय अस्पतालों में हाल ही में हुए प्रसव (Delivery) का डेटा खंगाला जा रहा है ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके।
जाँच का दायरा एवं सामाजिक चिंता —
ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि लोकलाज के डर से या अवैध संबंधों को छिपाने के इरादे से मासूम की हत्या कर उसे यहाँ छोड़ा गया है। पुलिस सीसीटीवी कैमरों और आशा कार्यकर्ताओं की मदद से संदिग्धों की तलाश कर रही है। यह घटना दर्शाती है कि समाज में आज भी जागरूकता की भारी कमी है, जिसके कारण मासूमों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है।
“औरैया की यह घटना क्रूरता की पराकाष्ठा है। किसी मासूम को इस तरह तड़पाकर मार देना समाज के माथे पर कलंक है। हम बार-बार अपील करते हैं कि यदि आप शिशु का पालन-पोषण करने में सक्षम नहीं हैं, तो उसे मारें नहीं। कानून आपको ‘सुरक्षित समर्पण’ (Safe Surrender) का अधिकार देता है। झाड़ियों या खेतों में छोड़ना हत्या के समान अपराध है, जबकि सरकार को सौंपना उस बच्चे को एक नया जीवन दे सकता है।”
— मोनिका आर्य, जर्नो एक्टिविस्ट व संस्थापक, पा लो ना
Call To Action —
कानूनी विकल्प चुनें: नवजात को असुरक्षित न छोड़ें; उसे कानूनी रूप से CWC (बाल कल्याण समिति) या सरकार को सौंपें।
सूचना दें: किसी भी असहाय या संकट में फंसे बच्चे की जानकारी तुरंत 1098 (चाइल्डलाइन) या पुलिस को दें।
जागरूकता फैलाएं: सुरक्षित समर्पण के बारे में लोगों को बताएं, ताकि औरैया जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो
