मुंबई पुलिस ने नवजात बच्ची को बचाया
Mumbai Police Rescue Newborn Baby in Mahim
माहिम, मुंबई | 03, मई 2026 | टीम पालोना
मुंबई के व्यस्त माहिम इलाके में एक मासूम की जिंदगी और असुरक्षा के बीच जागरूकता की जीत हुई है। फुटपाथ पर छोड़ी गई एक नवजात बच्ची के रोने की आवाज सुनकर एक नागरिक ने जिस संवेदनशीलता का परिचय दिया, वह समाज के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह घटना दर्शाती है कि यदि नागरिक सजग हों, तो किसी भी मासूम को समय रहते संकट से बचाकर सुरक्षित भविष्य दिया जा सकता है।
‘पा लो ना’ टीम को सूचना —
इस घटना की सूचना ‘पा लो ना’ को हैदराबाद की श्रीमती मीरा मारती (WAIC) द्वारा साझा की गई.
घटना का विवरण —
घटना रविवार, 3 मई 2026 की शाम की है. मुंबई के माहिम वेस्ट स्थित विक्टोरिया स्कूल के पास एक फुटपाथ पर खड़े पानी के टैंकर के पीछे से स्थानीय निवासी ओमकार नवल हतलकर (40) ने शिशु के रोने की आवाज सुनी,पास जाकर देखने पर वहां गुलाबी और नीले रंग के कपड़े में लिपटी एक नवजात बच्ची असहाय अवस्था में मिली. श्री हतलकर ने बिना विलंब किए तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित किया.
रेस्क्यू और उपचार की स्थिति —
- त्वरित सहायता: सूचना मिलते ही माहिम पुलिस की मोबाइल यूनिट से पुलिस कांस्टेबल सुजाता जगन्नाथ वाघमारे और एमएसएफ कर्मी सन्नी हुंदलकर मौके पर पहुंचे और बच्ची को अपनी सुरक्षा में लिया.
- स्वास्थ्य जांच: बच्ची को तत्काल सायन अस्पताल (Sion Hospital) ले जाया गया. डॉक्टरों के अनुसार बच्ची की स्थिति पूरी तरह स्थिर (Stable) है और उसे उचित चिकित्सा देखरेख में रखा गया है.
- वर्तमान स्थिति: पुलिस प्रशासन और बाल कल्याण इकाई के समन्वय से शिशु को सुरक्षित संरक्षण प्राप्त है.
प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई —
माहिम पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 93 के तहत रिपोर्ट दर्ज की है. पुलिस प्रशासन आसपास के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाल रहा है ताकि उन व्यक्तियों की पहचान की जा सके जिन्होंने शिशु को इस तरह असुरक्षित छोड़ा.
‘पा लो ना’ का दृष्टिकोण —
“नागरिकों द्वारा दिखाई गई यह सजगता ही मासूमों का सुरक्षा कवच है। ‘पा लो ना’ का मानना है कि हर बच्चे को जीवन का अधिकार है। मुंबई के जागरूक नागरिकों और पुलिस की तत्परता ने साबित किया है कि समाज की सक्रियता से मासूमों को जोखिम भरे हालातों से निकाला जा सकता है। हमारा उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा असुरक्षित न छोड़ा जाए।”
— मोनिका आर्य, जर्नो-एक्टिविस्ट व संस्थापक, ‘पा लो ना’
(Call To Action) —
बच्चे को सड़क किनारे या असुरक्षित स्थान पर छोड़ना उसके जीवन के लिए घातक हो सकता है। यदि कोई परिवार बच्चे का पालन-पोषण करने में सक्षम नहीं है, तो कानून उन्हें ‘Safe & Legal Surrender’ (सुरक्षित और कानूनी समर्पण) का मार्ग देता है। आप बिना किसी कानूनी भय के बच्चे को नजदीकी बाल कल्याण समिति (CWC) या अस्पताल को सौंप सकते हैं।
चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098 | पुलिस सहायता: 112
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