8 माह का बेटा तीसरी पत्नी से जन्मा था
भूख, प्यास और गर्मी में झुलसने से हुई मासूम नवजात की मौत
मोरबी, गुजरात | 02 मई 2026 | टीम पालोना
रिश्तों में कड़वाहट और घरेलू कलह जब चरम पर पहुँचती है, तो उसका सबसे भयावह परिणाम मासूम नवजात बच्चों को भुगतना पड़ता है। मोरबी के हलवद में एक पिता ने अपने ही एक साल के बेटे को मरने के लिए असहाय छोड़ दिया।
‘पा लो ना’ टीम को सूचना —
इस घटना की प्राथमिक जानकारी ‘पा लो ना’ टीम को WAIC हैदराबाद की को-फाउंडर मीरा मारती जी द्वारा साझा की गई।
घटना का विवरण —
2 मई को सुसवाव गांव के पास नदी किनारे एक नवजात शिशु का शव मिला था। पुलिस जांच के दौरान मालूम चला कि बच्चे को उसके पिता राजू तेरसिंग बामणिया (24) ने ही वहां छोड़ा था। मूल रूप से दाहोद निवासी राजू अपनी नई प्रेमिका के साथ रहना चाहता था। इसे लेकर उसका अपनी तीसरी पत्नी से विवाद चल रहा था। इसी के चलते उसने अपने करीब एक साल के बेटे ‘नवशिक’ को रास्ते से हटाने का निर्णय लिया। बच्चा बीमार था और दूध भी नहीं पी रहा था। इसी बहाने राजू ने कहा कि वह उसे ननिहाल छोड़ आता है। और उसने उसी बहाने बच्चे को कड़कती धूप में ले जाकर झाड़ियों के बीच छोड़ दिया। जहां भूख प्यास और धूप में झुलसने के कारण बच्चे की मौत हो गई।
रेस्क्यू और उपचार की स्थिति —
- वर्तमान स्थिति: पुलिस ने शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। फॉरेंसिक रिपोर्ट में सामने आया कि मासूम की मौत कड़ी धूप में भूख और डिहाइड्रेशन के कारण तड़प कर हुई।
- कानूनी कार्रवाई: हलवद पुलिस ने आरोपी पिता के खिलाफ हत्या और साक्ष्य छिपाने की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।
‘पा लो ना’ का दृष्टिकोण —
“एक पिता का अपने ही बेटे के प्रति इतना क्रूर होना विचलित करने वाला है। यहां न कोई मजबूरी है, न हालात को दोष दिया जा सकता है, जिसकी वजह से एक बच्चे की जान चली गई। ये सीधे सीधे पेरेंटल नेग्लिजेंस का मामला है। उससे भी अधिक ये आपराधिक मनोवृत्ति को दर्शाता है। जिसे अपने नन्हें से बेटे पर रहम नहीं आया, वह पूरे समाज के लिए खतरा हो सकता है। राजू के कृत्य को किसी भी तर्क से उचित नहीं ठहराया जा सकता। ऐसे लोगों से निपटने के लिए हमें शिशु सुरक्षा के कानूनों को मजबूत करने की जरूरत है। इसीलिए पालोना लंबे समय से इन्फेंट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग कर रहा है।”
— मोनिका आर्य, संस्थापक, ‘पा लो ना’
Call to Action ——–
विकल्प चुनें, वध नहीं!
पारिवारिक झगड़े या मजबूरी का शिकार मासूमों को न बनाएं। यदि आप बच्चे का पालन-पोषण करने में सक्षम नहीं हैं, तो उसे असुरक्षित तरीके से कहीं छोड़ने के बजाय कानून की मदद लें। आप बिना किसी डर और अदालती कार्यवाही के बच्चे को ‘Safe & Legal Surrender’ के माध्यम से सुरक्षित भविष्य दे सकते हैं। आपकी गोपनीयता बनाए रखना हमारा और प्रशासन का कर्तव्य है।
चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098 | पुलिस सहायता: 112
