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Home    झोले में कपड़ों के नीचे मिला मासूम नवजात

Latest News On Infanticide

झोले में कपड़ों के नीचे मिला मासूम नवजात

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एक हफ्ते बाद पुलिस और चाईल्ड लाइन ने नवजात को किया रिकवर

पालोना ने की एफआईआर दर्ज करने की मांग

26 जून 2022, रविवार, बक्सर, बिहार।

KAPDO KE NICHE DABA MILA NAVJAT

खुले में रखा वह झोला हिल रहा था। उसमें से बच्चे के रोने की आवाज भी आ रही थी। जब उसे खोला तो उसमें कई कपड़े मिले। उस झोले में ही कपड़ों के नीचे मिला मासूम नवजात। सबसे पहले दसई राम जी ने उसे देखा। वे उसे अपने घर ले गए, लेकिन कुछ देर बाद ही निकटवर्ती गांव की उनकी परिचित महिला श्रीमती सुनीता देवी आकर उनसे बच्चे को ले गई। करीब एक हफ्ते बाद चार जुलाई को चाईल्डलाइन और पुलिस को घटना की जानकारी हुई और तब बच्चे को सुनीता देवी से लिया गया।

पालोना को घटना की सूचना जमुई के पत्रकार श्री राजेश कुमार से मिली। उन्होंने बताया कि बक्सर में झोले में कपड़ों के नीचे मासूम दबा मिला है। वहां धनसोई थाना क्षेत्र के सुखपुर गांव में रविवार को ये घटना घटी। बक्सर के पत्रकार श्री संजय उपाध्याय, थाना प्रभारी श्री कमल नयन पांडे, बच्चे को बचाने वाले श्री दसई यावद के साथ साथ बच्चे को ले जाने वाली सुनीता देवी से भी पालोना ने बातचीत की और पूरे घटनाक्रम को समझने का प्रयास किया।

https://paalonaa.in/wp-content/uploads/2022/07/VID-20220705-WA0010.mp4

 

किसने क्या कहा

दोपहर चार- साढ़े चार बजे का समय था, जब हम अपनी दुकान बंद कर अंदर घर में सो रहे थे। हमें नहीं पता था कि बाहर कौन क्या कर रहा है।  हमारी बहन को किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। बहन ने जंगले (खिड़की) में से झांका और बोली कि उधर बच्चा है। हमारी एक भतीजी है। हम दौड़ कर गए कि कहीं वो गिर तो नहीं गई है। वहां जाकर देखा कि एक झोला है। इसी झोले में कपड़ों के नीचे दबा हुआ मिला मासूम नवजात। वह बच्चा (लड़का)  कहर रहा था। जहां बच्चा मिला, वह जगह हमारे घर के पीछे ही है। 

हमने अपनी चाची रीता देवी को बुलाया। पूरी भीड़ लग गई थी। हम चाची को बोले कि बच्चे को उठाओ। किसी का भी बच्चा है तो क्या हुआ। ऐसे नहीं छोड़ सकते। हम लोगों ने बच्चे को उठा लिया। हमने थाने को भी बता दिया था। फिर बगल के गांव से हमारी एक परिचित ने हमसे वो बच्चा मांगा। उनके दो बेटियां है। तो हमने उन्हें दे दिया। एक घंटे बाद ही वह बच्चे को ले गईं थीं। वो बच्चा चार-पांच दिन का रहा होगा।

  • श्री दसई यादव, बच्ची को बचाने वाले, बक्सर, बिहार।

 

हमें घटना की जानकारी मीडिया की खबरों से मिली। सुबह से उस बच्चे को ढूंढ रहे थे। मालूम हुआ कि दिनारा की महिला सुनीता देवी उस बच्चे को ले गई हैं। तब वहां जाकर बच्चे को रिकवर किया गया है। सुनीता देवी के ममताभाव को देखकर पुलिस भी भावुक हो गई। वो बच्चे को देने को तेैयार नहीं थीं। किसी तरह उनसे बच्चे को लिया गया। वह खुद भी साथ में थाने आईं। दसई राम की तरफ से हमें बच्चे की कोई सूचना नहीं मिली थी। फिलहाल इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। कार्रवाई तो होनी चाहिए। हम अपने वरीय पदाधिकारियों से भी संपर्क कर रहे हैं।

  • सब इंस्पेक्टर कमल नयन पांडे, थाना प्रभारी धनसोई, बक्सर, बिहार।

पालोना का पक्ष

पालोना ने थाना प्रभारी कमल नयन पांडे जी को आईपीसी व जेजे एक्ट के सेक्शंस बताते हुए इस केस को दर्ज करने का अनुरोध किया। साथ ही इसी से मिलते जुलते पुराने केस की एफआईआर की कॉपी भी उनके साथ शेयर की, ताकि उन्हें ड्रॉफ्टिंग में मदद मिले।

बाल संरक्षण से जुड़े अधिकारियों को बक्सर के शहरी व ग्रामीण इलाकों में सरकार की सेफ सरेंडर पॉलिसी के बारे में जागरुकता अभियान चलाना चाहिए, ताकि लोग अपने बच्चों को असुरक्षित न छोड़ें, बल्कि चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को सौंप दें। यह प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय रहती है। इसमें बच्चा सौंपने वाले की पहचान उजागर नहीं की जाती।

सेफ सरेंडर के साथ-साथ एडॉप्शन की प्रक्रिया के बारे में भी जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि लोग परित्यक्त मिले बच्चों को अपने पास रखने या किसी को भी देने की बजाय सरकारी संस्थाओं जैसे पुलिस, चाईल्डलाइन या सीडब्लूसी को सूचित करें।

याद रखें

12 साल से छोटे किसी भी बच्चे को असुरक्षित छोड़ना जघन्य अपराध है, जिसमें सात साल की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इसके अलावा, बच्चे को बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किए अपने पास रखना भी कानूनन अपराध है। 

 

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PaaLoNaa is a cause dedicated to those infants who have been shunned by their own parents. These infants are adandoned in deserted public places like railway lines, ponds, bushes, forests, barren lands for some or the other reasons, compulsions, fears or greed.

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