पेट्रोल पंप के पास सफेद गमछे में मिली थी बच्ची
वजन था मात्र 500 ग्राम, पुलिस ने नहीं किया केस दर्ज
03 अगस्त 2022, बुधवार, आरा, बिहार।
भोजपुर (आरा) जिले के जगदीशपुर में बुधवार सुबह एक मासूम बच्ची मिली। नवजात बच्ची पेट्रोल पंप के पास मिली थी। उसका वजन महज़ 500 ग्राम था। सदर अस्पताल के एसएनसीयू में इलाज के दौरान बच्ची की मौत हो गई।
पालोना को इस घटना की सूचना गूगल सर्फिंग के दौरान मिली थी। इसके बाद आरा की चाइल्ड लाइन डॉयरेक्टर श्रीमती सुनीता सिंह, जिला समन्वयक श्री डी.के. सिंह व प्रत्यक्षदर्शी श्री संजय कुमार से बात कर पूरी जानकारी ली गई। श्री संजय ने ही बच्ची को सदर अस्पताल में एडमिट करवाया था।
किसने क्या कहा.
सदर अस्पताल के एसएनसीयू इंचार्ज डॉ.मुहम्मद अमन हसन ने सुबह 11 बजे के करीब मुझे फोन किया। उन्होंने बताया कि जगदीशपुर में बच्ची मिली है। मेरा घर अस्पताल के नजदीक ही है। सीडब्लूसी को सूचना देने के बाद मैं अस्पताल पहुंच गया बच्ची को देखने के लिए। साथ ही स्पेशल एडॉप्शन एजेंसी को भी फोन कर दिया, ताकि बच्ची की देखभाल के लिए वहां से नर्स मिल जाए।
1600 ग्राम से कम वजन के बच्चों को एसएनसीयू में रखा जाता है। लेकिन ये बच्ची तो बस 500 ग्राम की ही थी। उसकी नाभि पर नीले रंग का क्लिप भी लगा डॉक्टर ने कहा कि इसके बचने के चांस बहुत कम हैं। दो घंटे के बाद बच्ची की मौत हो गई। –श्री डी.के. सिंह, चाइल्ड लाइन समन्वयक, आरा, बिहार।
मैं आरा में रहता हूं। 03 तारीख को मेरे साले संदीप कुमार का फोन मेरे पास आया कि जगदीशपुर में रामदास टोला के पेट्रोल पंप के पास एक नवजात बच्ची सड़क पर मिली है। सड़क पर बच्ची को सबसे पहले खेत में काम करने वाली एक महिला ने देखा था। वहां लोगों की भीड़ लगी थी।
मेरा साला वहां से गुजर रहा था तो उसने ये देखा और मुझे फोन किया। मेरे दो लड़के हैं और मैंने अपने साले को बोला हुआ था कि यदि कोई बच्ची कहीं मिले तो मैं उसे गोद लेना चाहता हूं। इसलिए उन्होंने मुझे इस बच्ची की सूचना दी थी। जब बच्ची मिली तो उसको गर्भनाल नहीं लगी हुई थी।
मैंने उन्हें कहा कि बच्ची को जगदीशपुर अस्पताल लेकर जाओ, मैं भी आ रहा हूं। जगदीशपुर आरा से करीब 20-22 किलोमीटर दूर है। मैं जब तक जगदीशपुर पहुंचा, वो महिला और मेरा साला बच्ची को अनुमंडल अस्पताल में ले आए थे। पुलिस भी वहां पहुंच चुकी थी। वहां डॉक्टर दयानंद ने बच्ची का चैकअप करने, उसे फर्स्ट एड देने के बाद आरा के लिए रैफर कर दिया। तब मैंने बच्ची को आरा के सदर अस्पताल में ले लाकर एडमिट करवाया। – श्री संजय कुमार, बच्ची को सदर अस्पताल में एडमिट करवाने वाले, आरा, बिहार।
पालोना का पक्ष
पालोना को आशंका है कि इस बच्ची का जन्म कहीं एबॉर्शन के परिणामस्वरूप न हुआ हो। कई बार गर्भ में ही बच्चे को मारने की कोशिश की जाती है, लेकिन बच्चे जीवित निकल आते हैं। वैसे में उन्हें स्वाभाविक मृत्यु का रूप देने के लिए छोड़ दिया जाता है।
कहीं ये ‘एबॉर्शन सर्वाइवर’ तो नहीं
दो साल पहले हरियाणा के सोनीपत जिले से ऐसा ही एक मामला पालोना के सामने आया था।
ये बच्चे बोर्न अलाइव बेबीज या एबॉर्शन सर्वाइवर्स कहलाते हैं। इस बच्ची का पूरा सच तभी सामने आ सकता है, जब शव का पोस्टमार्टम किया जाए। लेकिन बिहार में नवजात शिशुओं की हत्या को गंभीरता से नहीं लिया जाता। वहां इन मामलों में न तो कोई केस दर्ज होता है, न ही जांच पड़ताल। वर्तमान में इन बढ़ती हुई घटनाओं को देखते हुए ये चिंतनीय है। इस तरह के लापरवाही भरे रवैये से बिहार पुलिस समाज में व्हाईट कॉलर्ड क्रिमिनल्स को बढ़ावा दे रही है, जो समाज में घुले मिले रहते हैं और लोग उनके अपराध के बारे में अनजान व उनके प्रति निश्चिंत रहते हैं।



