नैनीताल में 6 फरवरी 2020 को घटित एक घटना ने न्यायिक व्यवस्था और समाज के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना में एक नवजात बच्ची बर्फीले नाले में मिली थी, जिससे एक दर्दनाक और जटिल मामले की परतें खुलीं। मामले की जांच के बाद पता चला कि नाबालिग मां के साथ उसके जीजा ने संबंध बनाए थे, जिनके परिणामस्वरूप बच्ची का जन्म हुआ था। लेकिन इसमें जान लड़की के चचेरे भाई की चली गई। इस घटना के बाद आरोपों और विरोधाभासों की एक लंबी कहानी सामने आई।
स्थानीय मीडिया के अनुसार, नैनीताल के मल्लीताल क्षेत्र में 6 फरवरी 2020 को सर्दियों के दिनों में जबकि बर्फ पड़ी हुई थी, नाली में एक नवजात बच्ची मिली थी. उसे पहले बीडी पांडे और फिर डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में भर्ती कराया गया. इससे नवजात की जान बच गई. इस मामले में Police ने नवजात के फेंक जाने का मामला दर्ज कर जांच पड़ताल की. इस बीच बच्ची को जन्म देने वाली 15 साल की नाबालिग किशोरी की हालत बिगड़ी तो उसे हल्द्वानी के डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में भर्ती कराया गया. Police की जांच में डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में भर्ती किशोरी ने कबूल किया कि नाली में फेंकी बच्ची उसी की है
घटना के शुरुआती दौर में 15 वर्षीय मां ने अपने 17 वर्षीय चचेरे भाई पर आरोप लगाया, जिसके परिणामस्वरूप उसे गिरफ्तार किया गया और बाल सुधार गृह भेजा गया। कुछ दिनों बाद, जब वह बाहर आया तो उसने 17 अप्रैल 2020 को आत्महत्या कर ली। डीएनए जांच से यह साफ हुआ कि वह बच्ची का पिता नहीं था।
वीडियो देखें – झूठे आरोप ने ले ली चचेरे भाई की जान
बेटे को खोने के बाद लड़की के चाचा ने पुलिस को घर के अन्य पुरुषों की डीएनए जांच के लिए कहा। इस हस्तक्षेप के बाद जांच ने एक नया मोड़ लिया। किशोरी के जीजा का डीएनए नवजात से मेल खाने पर उसे दोषी ठहराया गया। अपर सत्र न्यायाधीश/स्पेशल जज पॉक्सो हल्द्वानी कोर्ट ने सोमवार 13 मई 2024 को उसे 20 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। उस पर 20 हजार का जुर्माना भी लगाया है।
इस घटना ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं:
नैनीताल की इस घटना ने हमें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कैसे कानून का सही और न्यायपूर्ण इस्तेमाल हो, ताकि न्याय प्रणाली में सभी को विश्वास हो सके। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और न्याय की प्रक्रिया तेज और निष्पक्ष हो। न्यायपालिका और समाज को मिलकर ऐसे मुद्दों पर विचार करना चाहिए ताकि कानून का दुरुपयोग न हो और असली अपराधियों को सजा मिल सके।
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